Monday, September 23, 2013

दिल तोड़ना तुम्हे खूब आता है

तुम्हे आदत है मेरे खुम्हर की,
की रोज़ यूँ ही आजाते हो |
बुलाया तो नही था तुम्हे,
फिर भी तुम्हारी आदत से खुद को जोड़ लिया है |

उम्मीद के संयोग से बँधे हुए हैं हम,
की अब आदतों को दावा समझ पीकर,
रोज़ इस ज़हरीले दर्द को,
अपने दरमियाँ दस्तक देते हैं |

मीठे शब्दों से घोलते हो दर्द की पूडिया,
जिसके हम हक़दार कहाँ?
फिर भी पी लेते हैं इस घम की पूडिया को,
क्या पता यह घम ही नशा कर जाए |

मगर भूल जाते हो तुम,
की यह मोहब्बत नही है हुमारी,
मोहब्बत है तो सिर्फ़ दर्द से,
यह कम्बख़्त इस ही दर्द का नशा है |

जानते हुए भी किसी को दर्द देना,
इंसान का ही तो पेशा है,
इस पेशे के नशे में ऐसे डूब गये हो,
की अब दिल तोड़ना तुम्हे खूब आता है |


4 comments:

Unknown said...

Sonalika di
I am just out of words reading this. I re-read this so many times! Oh my god! You are sheer brilliance.
keep writing! :) :* <3

mayank said...

Feelings n words...perfect match...can see the world in it...awsm work...kp writing!!!

Sonalika Chaturvedi said...

Big hug you're getting soon :)

Sonalika Chaturvedi said...

Aavi!! Thanks so much - this means so much to me ... You've served as an inspiration so with your great writing .. Love you