तुझसे बातें करती हूँ,
तो मुझे घाम भी है और खुशी भी।
तेरी बातों को सीने से लगाके,
एक सुकून भी है और एक दर्द भी।
दिल की तह से एक आस उठती है,
की तुम यूँ ही मेरे पास रहो..
तेरी आवाज़ सीने में एक पहेल मचती,
की मेरे कानो में सन्नाटा ना हो।
ज़ुबान से होटो तक बात जो आई,
उस ही ने इस मासूम दिल को दबा दिया।
की पूछोगे तो बताती तुम्हे एक कहानी..
सच तो, खैर, दिल की गुफ़ाओं में क़ेद हुआ।
की यूँ इंतेज़ार जब करती हूँ तेरा,
तो बहलाती दिल को क्यूँ ना जाने..
मगर दिल का मचलना जब दर्द बंजये,
उस दिन तुम आना मरहम लगाने।
2 comments:
I can keep reading the first paragraph forever, it's so beautifully written.
Aur bilkul tumhari hi tarah hai, padhta hun toh mere dimaag mein awaaz bhi tumhari hi chalti hai. Jaise tumne khud ko pighla kar kavita bana liya ho.
Again my first comment from you ! Thank you ! :)
Post a Comment