Monday, October 28, 2013

उन्होने सपने दिखाए (Day 28)

खेल-कूद, वह बचपन के
उन्होने जीत की सीख दी
दूसरों के बचपन से भी
किताबों से बेहतर सीख ली,
और अपने बचपन की भी सीख बाँटी

उन्होने कहा था, की कोशिश करो
उम्मीद की डोर खीँचो, 
और फिर ढील दो, 
ऊँची उडेगी यह उम्मीद
आसमान में ढल जाओगी

पढ़ाई किताबों तक सीमित ना की 
नज़रिया किताबों के बाहर भी बना
दुनिया दिखाई दिल-ओ-दिमाग़ बढ़ते चले
रोज़ उन्होने सपने दिखाए
उनको पूरा करने की शामता बढ़ाई

3 comments:

TO TOUCH THE HORIZON said...

I had a little trouble reading hindi..but a fine write indeed.

Sonalika Chaturvedi said...

So sweet! Thank you :)

Lady Whispers said...

So very beautifully said :)
Loved it.